Monday, November 1, 2010

दिल्ली के ठाठ

नमस्कार,
स्वागत है, आज सुबह समाचार चैनल्स पर पर नज़र डाली तो देखा की युवराज (राहुल गांधी) ने इस बार फिर मुंह खोला है और खोलते ही मुसीबत में फंस गए हैं .. इस बार उन्होंने कहा है की "बिहार चमक रहा है तो क्यों भाग रहे हैं लोग " अब इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कहा की युवराज प्रधानमन्त्री से पहले मुख्यमंत्री बन कर देखें ...
तो भाई इस पर मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा की
"भाई बिहार के लोग तो भागकर भी भारत में ही रहते हैं, लेकिन युवराज (राहुल गांधी) तो सीधे विदेश जाकर (इतना ही नहीं उनके दिवंगत पिता जी भी) पढाई करते हैं .
क्या १९४७ से आजतक कांग्रेस पार्टी ने भारत की शिक्षा के स्तर में इतनी ही तरक्की की है ..?? .
जब आप उत्तर प्रदेश से होकर भी सेंट स्टीफंस कालेज में हिंदी में फेल हो सकते हो .... तो बिहार ५ साल में चमक जाए ऐसा क्यों सोचते हैं मालिक आप ..?? आपकी सरकार ने तो १९४७ से अब तक नहीं चमकाया और जैसे ही आप के हाथ से सत्ता गयी तो आप को चमकना और चमकाना याद आ गया .. माना की वहां आपकी नहीं लालू प्रसाद यादव जी की सरकार थी लेकिन क्या सिर्फ इसलिए तब आपने कुछ नहीं कहा क्योंकि लालू जी आपकी केंद्र सरकार में सहायक की भूमिका निभा रहे थे ...
ऐसा भी नहीं है की बिहार से झारखंड अलग होने के बाद बिहार की सारी संपदा चली गयी.. हाँ कुछ हद तक यह जरूर सही है पर पूरी तरह नहीं , भाई कोई ये बताये की बिहार में जो खनिज सम्पदा है उससे बिहार की तरक्की का रास्ता खोजने की बजाय उसकी सारी संपदा से आने वाला पैसा तो आपकी केंद्र सरकार दिल्ली में लगा देती है और दिल्ली भी वो जो उत्पादन के नाम पर जीरो है कुछ भी नहीं कमाती न ही कुछ पैदा करती है दिल्ली में ऐसा क्या है की सब कुछ झोंक देने के बाद भी आपकी केंद्र सरकार दिल्ली को नंबर एक का राज्य नहीं बना पायी, जबकि दिल्ली इतनी छोटी है की अगर आप चाहें तो ५ साल में इसकी काया पलट कर सकते हैं पर काया पलटने के नाम पर भी यहाँ क्या हुआ है देख लीजिये पूरा का पूरा राष्ट्रमंडल खेल २०१० इसकी कहानी गा नहीं रहा बल्कि चीख-चीख कर बता रहा है यहाँ राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर केंद्र सरकार और उसके मंत्री अपने घर भर लेते है जिसमें ऊपर से नीचे तक सब शामिल है प्रधानमन्त्री और पार्टी अध्यक्ष मैडम जी भी कोई जवाब नहीं देते .. ये किसकी गलती है ..?? ?
क्या कलमाड़ी महोदय की इतनी औकात है की वो सिर्फ एक एमपी होकर इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकें.. पर छोड़िये साहब अभी बात बिहार की है तो बिहार की कहानी ये है की वहां जितनी अंधेर गर्दी लालू जी ने की थी उतनी तो शायद कोई कर ही नहीं सकता और करेगा भी तो पकड़ा जायेगा , लेकिन ये तो लालू जी की ही महिमा है की आज भी खुले आम घूमते है और बाकायदा चुनाव भी लड़ते है.. बाकी ज्यादा क्या कहें भैया .. सब मीडिया की माया है आज कल तो .. जिसने राजेश खन्ना के उस गाने को झूठा साबित कर दिया " ये पब्लिक है ये सब जानती है पब्लिक है" अब तो भैया कहानी ये है की जो मीडिया दिखाता है पब्लिक भी वही मानती है और मेरे एक मित्र को इसका एकदम निजी अनुभव है .. क्योंकि अब लोग कहते हैं की भैया दिखावे है तो सच ही होता होगा ..?? और बाकी चुनाव शुरू हो ही गए हैं फैसला आ जायेगा की कौन क्या चाहता है ??

और भाइयों वैसे भी ये हाल सिर्फ बिहार का नहीं है ये हाल है बिहार, झारखण्ड और उड़ीसा सहित अन्य कई राज्यों का है जो संपदा और कई अन्य मामलों में दिल्ली से कहीं ज्यादा अमीर हैं लेकिन बस दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी होने की कीमत चुका रहे हैं ...
धन्यवाद
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