Monday, December 20, 2010

अमीर गरीब और प्याज

आपको कैसा लगेगा अगर आप टीवी पर समाचार देख रहें है जहां 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले, राष्ट्रमंडल खेलों में हुए खेल, आदर्श घोटाले और राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दे पर बुद्धिजीवी वर्ग अपनी राय दे रहा हो। लोकसभा में विपक्ष जेपीसी की मांग कर रहा हो, जन्तर-मन्तर और रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार को लेकर रैलियां और प्रदर्शन किए जा रहें हों और अचानक आप अपने टीवी पर ब्रकिंग न्यूज देखें कि ‘प्याज के आंसू रो रही है जनता'। दिमाग चकरा जाता है कि अचानक इतने बड़े मुद्दों के बीच प्याज कहां से आ गई?

लेकिन ऐसा हर जगह हो रहा है और जो बुद्धिजीवी लोग पहले घोटालों और भ्रष्टाचार पर बोल रहे थे वही अब प्याज पर टिप्पणियां दें रहें हैं। आखिर ये प्याज है क्या .? हमने तो सुना है कि सब्जी है और शायद आपने भी। लेकिन चक्कर ये है कि अब प्याज मंहगी हो गई है। मैंने सोचा कि अब इसमें भी क्या बड़ी बात हो गई पिछले दो सालों में चीनी, चावल, आटा, दाल और सब्जियों के साथ-साथ जरूरत की सभी बुनियादी चीजें महंगी हो रही है तो प्याज पर हल्ला क्यों?
थोड़ा पीछे चलें तो ये भी समझ आ जाता है प्याज में वो ताकत है वो शक्ति है जो न तो अमेरिका के साथ हुए १२३ समझौते में थी न राष्ट्रमंडल खेल और न ही आज तक के सबसे बड़े घोटाले 2जी स्पेक्ट्रम में थी। क्योंकि ये सभी मुद्दे कितने भी बड़े हो लेकिन सरकार नहीं गिरा पाए लेकिन मालिक ये प्याज सरकार गिरा सकती है लो साहब आप तो हंस पड़े। अरे भाई हंसो मत ये प्याज ऐसा पहले भी कर चुकी है एक बार, याद है न 1998 । इसलिए इस बार सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती और इसी लिए 15 जनवरी तक प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री ने भी बयान दे कहा कि जल्द सस्ती होगी प्याज।

मेरे दिमाग में एक सवाल आया कि क्या प्याज जीवन की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी कोई सब्जी है तो जवाब है नहीं। ऐसा मै समझता हूं । क्योंकि जहां मैं रहता हूं वहा तकरीबन ऐसे दस परिवारों को जानता हूँ जो प्याज को खाने की बात तो छोड़िए साहब खरीदते तक नहीं हैं। प्याज को मुंह तक नहीं लगाते। और अगर आपने गलती से उन्हें खिला दी तो आपको मारने पर आमादा हो सकते हैं। तो प्याज बुनियादी जरूरत भी नहीं है जैसे कि आटा, दाल और अन्य कुछ सब्जियां हैं। तो प्रश्न यह है कि लोगों ने आटा, दाल और अन्य सब्जियों के महंगे होने पर तो इतना शोर नहीं मचाया जितना कि प्याज के महंगा होने पर मचाया जा रहा है। बाकायदा मुद्दा बन गया है प्याज का महंगा होना।
ऑफिस में भी जब बात छिड़ी तो पता लगा कि मासाहारी लोगों के लिए प्याज का महंगा होना और वो भी इतना महंगा होना परेशानी का सबब बन गया है। उनके खाना बनाने की लागत बढ़ गई है। तो मुद्दा थोडा समझ आया की इतना शोर क्यों है

वैसे मेरी राय में अब प्याज का मुद्दा उतना बड़ा नहीं रहा जितना कि 1998 में था। क्योंकि अभी तक मैंने लोगों कि आवाज कम और नेताओं ओए मीडिया की आवाज ज्यादा सुनी है इसका एक कारण बाबा रामदेव भी हो सकते हैं जिन्होंने प्याज को तामसिक और स्वास्थ्य के लिए हानि कारक भोजन बता कर लोगों को प्याज से दूर रहने की सलाह दी है। और 1998 का हवाला देते हुए बाबा रामदेव ने एक बार यह भी कहा था कि अगर प्याज महंगी हो गई थी तो मात्र एक महीने के लिए प्याज खाना छोड़ देते फिर देखिए पहले से भी ज्यादा सस्ती प्याज बाजार में उपलब्ध हो जाती . मुझे तो यह रास्ता पसंद है क्योंकि अगर प्याज बुनियादी जरूरत नहीं है तो ऐसा किया जा सकता है.

मुझे तो ऐसा लगता है कि यदि लोगों ने बाबा रामदेव का कहा नहीं माना तो ऐसा न हो कि ये प्याज इतनी बड़ी हो जाए कि देश में अमीर और गरीब की लड़ाई ही खत्म हो जाए और देश में दो ही वर्ग रहें एक प्याज खाने वाला (अमीर) और एक प्याज न खाने वाला (गरीब)।
क्या कहतें हैं आप ..??