Saturday, January 8, 2011

अनुभव सोच+आलय का..

बचपन में सुना था की शौचालय में नयी नयी सोच और नए विचार दिमाग में आते हैं अब ऐसा सच में होता है या लोग सिर्फ मजाक में कहते हैं ये मुझे पता नहीं . और फिर दिमाग में विचार आने के लिए आपको विचारक होना चाहिए ऐसा मुझे लगता है बाध्यता नहीं है पर फिर भी . और मेरे जैसा दिमाग है इसमें तो खुराफात ही आ सकती है फिर चाहे हम सोचालय में हो या पार्लियामेंट में .
और हाँ अब यहाँ कुछ ऐसा होगा जो शायद लेखों के इतिहास में पहली बार हुआ होगा मतलब लेख शुरू होने के 6 लाइन बाद ही लेख का शीर्षक बदल रहा हूँ और ये इसलिए की मैं थोडा कन्फ्यूज़ था इन दोनों शीर्षकों को लेकर तो दोनों ही रख दिए!
तो अब मैं अपना वो अनुभव लिख रहा हूँ जो बहुत से लोग दूसरों के सामने बोलने में भी शर्माते हैं अनुभव 'सोच+आलय' का –
'सोच+आलय' में घुसते ही न जाने कहाँ से दिमाग में आया की अपने देश की संसद (पार्लियामेंट) और पड़ोसी देश पकिस्तान में ज्यादा अंतर नहीं रह गया है .
पाकिस्तान =पार्लियामेंट ---???
इसी सोच को आगे बढाते हुए मैंने सोचा की पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकवाद फैला कर हमारे देश में धन और जन की हानि लगातार बनाये रखता है वहीँ दूसरी और हमारी पार्लियामेंट यानी भारतीय संसद ने पिछले २ सालों से महंगाई को लगातार रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाकर मध्यम वर्गीय जनता के धन पर डाका तो डाला ही है वहीँ गरीब की तो जान पर ही बन आई है फिर जैसे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री आतंकवाद रोकने और उसमे कमी लाने के बयान बार बार जारी करते है पर होता कुछ नहीं है वैसे ही आपको अपनी संसद में वित्तमंत्री प्रणब दा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह महंगाई पर काबू पाने उसे रोकने और मूल्य वृद्धि कम करने के लिए बयान जारी करते दावा करते लगातार नज़र आयेंगे है लेकिन होता कुछ नहीं है महंगाई भी बढती है और आतंकवाद भी.

फिर ख्याल आया की जैसे कश्मीर के हालात बने हुए हैं जहाँ पत्थरबाजों को पत्थरबाजी करने के लिए १०० रुपये प्रतिदिन दिया जा रहा है और पत्थर भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं और ये सारा पैसा पाकिस्तान से आता है जिससे की कश्मीर में अशांति बनी रहे और यह सब सिर्फ कश्मीर को कब्जाने की साजिश के चलते किया जा रहा है. पाकिस्तान कश्मीर को तोड़कर पकिस्तान में मिलाना चाहता है और इसके लिए स्वतंत्रता के बाद से अब तक छल और बल सभी प्रकार के प्रयोग करता आ रहा है. दूसरी और भारतीय संसद पाकिस्तान का साथ देती नज़र आती है क्योंकि संसद की ही कमजोर और उपेक्षाकारी नीतियों के कारण कश्मीर में अलगाववादियों की आवाज़ इतनी बुलंद हो रही है. यही नहीं संसद की इन्ही महानगर केन्द्रित नीतियों को अपनाने के कारण ही आज कश्मीर से अलग भी भारत के कई हिस्से जिनमें बुंदेलखंड , गोरखालैंड , विदर्भ और वर्त्तमान में बहुप्रचलित तेलंगाना और अन्य कई क्षेत्र अलग राज्य बनने की मांग करने लगे है .

अर्थ नीति की और ध्यान गया तो याद आया की जैसे पाकिस्तान भारत में नकली करेंसी को फैला कर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना चाहता है और भी कई तरीको से भारत को आर्थिक क्षति पहुंचाता है उसी प्रकार अपनी संसद में बैठे लोगों द्वारा बनाई जाने वाली थकी हुई और बूढ़ी नीतियों से देश की अर्थव्यवस्था कमजोर तो हुई ही है दूसरी और हमारे माननीय संसद में बैठने वाले मंत्री गणों द्वारा विदेशी बैंकों जमा किया गया पैसा भी हमे गरीबी और भ्रष्टाचारियों की श्रेणी में भी हमें अच्छा ख़ासा स्थान दिलाये हुए है . अगर बैंक में पैसा जमा करने वालो के नामों का खुलासा हो जाये तो पता चल जाये की कौन कौन पाकिस्तानी निगम पार्षद , विधायक और सांसद है जो भारत को पाकिस्तान की तर्ज़ पर खोखला करने में लगे हैं.

फिर मैं कभी कभी देश की रक्षा के विषय में भी सोच लेता हूँ तो इस बार सोचालय में भी देश की चिंता हुई आखिर मैं खुद को सच्चे देश भक्तों में गिनता हूँ . छोड़ो मेरी बात फिर कभी करेंगे अभी पाकिस्तान और पार्लियामेंट को पकड़ते हैं तो यहाँ भी पड़ोसी पाकिस्तान और अपनी पार्लियामेंट कुछ कुछ एक जैसे ही है अब आप ही देखिये पाकिस्तान पिछले कई सालों से अपना रक्षा बजट में हर साल वृद्धि कर रहा है सब जानते है वो किसके लिए परमाणु हथियारों को जमा कर रहा है और इसी सब के चलते पाकिस्तानी बिल्ली पूरी शक्ति से भारत की दिल्ली को आँखे दिखा रही है . दूसरी और अपनी संसद है जहाँ पिछले कई सालों से रक्षा बजट घट तो रहा ही है बल्कि जो दिया जाता है उसमे से भी कुछ वापस आ जाता है ऐसा करने के दो कारण हो सकते है एक तो हम पाकिस्तान को बराबरी का मौका देना चाहते हैं और दूसरा की हम विश्व शक्ति का पद प्राप्त कर चुके हैं और अब हमें अपने सैनिकों और सीमाओं पर कुछ ज्यादा खर्चा करने की जरूरत नहीं है पर किसी को यह ध्यान नहीं है की पता नहीं क्यों पिछले कई सालों से सैनिक आत्म हत्या आर रहे है.

अब मेरे दिमाग ने और तेज़ दौड़ना शुरू किया और ताज़ा मुद्दे और 'अपने' कश्मीर के मुख्यमंत्री के बयान पर ध्यान गया जो कहतें हैं की अगर लाल चौक पर तिरंगा फहराने के बाद कोई दंगा होता है या घाटी में उबाल आता है या अशांति होती है तो उसके लिए बीजेपी खुद जिम्मेदार होगी. और बीजेपी को चेतावनी दी है की लाल चौक पर तिरंगा न फहराए. इस बार हुर्रियत के एक नेता ने बीजेपी को लाल चौक पर तिरंगा फहराने की चुनौती पाकिस्तानी तर्ज़ पर दी है और इस पर फारूक अब्दुल्ला और उनके मुख्यमंत्री साहबजादे उन अलगाववादियों का साथ देते नज़र आते हैं और तिरंगा फहराने के बीजेपी के कार्यक्रम को टालने की नसीहत दे रहे हैं जैसा की पकिस्तान चाहता है और इस पर भी कांग्रेसनीत केन्द्र सरकार चुप है तो मुझे यकीन हो गया की पाकिस्तान =पार्लियामेंट! मतबल दोनों में कोन्हो अंतर नहीं है भैया और इस मुद्दे पर लिखने और कहने को बहुत कुछ है पर फिर कभी कहूँगा और लिखूंगा क्योंकि मुझे याद आ गया है की मैं 'सोच+आलय' में बैठा हूँ और अब ज्यादा देर नहीं बैठ सकता तो भाइयों मैंने यदि इसमें कुछ गलत लिखा है तो अपने कमेन्ट में जरूर लिख दे क्योंकि अपनी कमियां देखना ज्यादा जरूरी है खाली पाकिस्तान को गाली देने से कुछ नहीं होगा पहले घर के गद्दारों का मिटना बहुत जरूरी है और अब मैंने फ्लश मार दिया है फील कीजियेगा .....

नोट : ये लेख लेखन कला के सभी नियमों को तोड़ता सा प्रतीत होता है जो लोग मेरी शैली पर मुझे डांटना चाहें डांट सकते हैं