नामकरण में चूक गई योगी सरकार
कुछ दिन पहले सैफीना को बेटा हुआ। बहुत ख़ुशी की बात थी कि
नवाब फैमिली में एक और नवाब आए। सो ट्विटर और फेसबुक समेत बॉलीवुड में बधाई
गाई जाने लगीं और इंतज़ार होने लगा कि नाम क्या होगा। लेकिन सैफीना परिवार
बेटा होने से पहले जितना फ़िल्म और क्रिकेट का था। बेटा होने के बाद उससे
ज्यादा राजनीतिक हो गया। क्योंकि उन्होंने बेटे का नाम तैमूर रख दिया था।
अब दुनिया के लिए तैमूर कुछ भी हो सकता था। लेकिन भारत के लिए वो एक लुटेरा
था, जिसने भारत आकर मार-काट मचाते हुए लूटपाट की। इतना ही नहीं हत्या करने
के बाद शवों की दीवार बना दी थी। ऐसे में लोगों ने नाम का खूब विरोध किया।
फेसबुक और ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा था कि नाम में क्या रखा है।
अब मुद्दे पर आते हैं। हालांकि मुद्दा वही है कि नाम में क्या
रखा है। लेकिन अबकी बार नामकरण में गलती दुसरे पक्ष से हुई। तैमूर का जो
लोग विरोध कर रहे थे। उस पक्ष कि सरकार यूपी में बनी तो सूबे के
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए
आनन-फानन में ऐंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन कर दिया। सरकार ने कदम तो ठीक
उठाया लेकिन अबकी बार सरकार नामकरण में चूक गयी। जी हाँ नामकरण में,
क्योंकि शेक्सपिअर का 'रोमियो' दिल से प्यार करने वाला और जान देकर उसे
निभाने वाले करेक्टर का नाम है।
पहले जानें रोमियो कौन है?
रोमियो शेक्सपियर की कहानी का वो किरदार है जिसकी माशूका थी
जूलियट। यह एक ट्रैजिक लव स्टोरी है। जिसमें रोमियो एक राजकुमार और जूलियट
एक राजकुमारी थी। जूलियट, रोमियो के पिता के दुश्मन की बेटी थी। रोमियो
ने जब तक जूलियट से प्यार किया उसकी भनक किसी को लगने नहीं दी थी। कहानी
का अंत कहता है कि रोमियो से शादी करने के लिए जूलियट ने नींद की दवा पीकर
अपने घर वालों को धोखा देने की कोशिश की। ताकि वे उसे मृत समझकर मकबरा में
डाल दें। लेकिन रोमियो को इसके बारे में कुछ नहीं पता था। उसने यही सोचा कि
जूलियट सच में मर गई और रोमियो ने भी जहर पीकर जान दे दी जिससे कि वो भी
मरने के बाद जूलियट के साथ रह सके लेकिन जब जूलियट को होश आने पर पता चला
कि रोमियो मर चुका है तो फिर उसने भी खुद को मार डाला।
'मुंह मार मर्द' नहीं था रोमियो
अब जो लोग रोमियो को सच्चा प्यार करने वाला मानते हैं। उन्हें
तो एंटी रोमियो स्कवॉड का नाम खटकना ही था। और खटकना भी चाहिए। क्योंकि न
तो रोमियो कोई मनचला था और न ही कोई मुंह मार मर्द। वो तो जिससे प्यार करता
था, उसके लिए जान देने वाला मर्द था। शेक्सपिअर की कहानी में कहीं ऐसा
नहीं लिखा कि रोमियो जिस लड़की को देखता था बस उसके पीछे हो लेता था। तो फिर
सरकार आपने काहे इस अभियान का नाम एंटी रोमियो स्कवॉड रख दिया आप कुछ और
भी नाम रख सकते थे। जैसे मुहं मार मर्द.. या भटके हुए आशिक़ .. पीछा किया है
तो पिटना पड़ेगा ... या फिर मजनू मारो दल ...
अभियान और बीजेपी को लगा झटका ...
योगी सरकार ने जिस उद्देश्य से एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाई थी
उसको बड़ा झटका तब लगा जब पुलिस ने सच ही सड़कों पर पार्कों में सिर्फ साथ चल
रहे लड़के लड़कियों को पकड़ के पूछताछ कर डाली। हुआ यूँ की पुलिस ने सहमति से
साथ जा रहे युवक युवतियों को भी निशाना बना लिया और कई जगह तो भाई बहन को
भी नहीं छोड़ा। भाई-बहन होने का सबूत देने के बाद ही उन्हें छोड़ा। ऐसे में
मेसेज गया कि सरकार प्यार विरोधी है। वैसे भी बीजेपी पहले ही बदनाम थी
वैलेंटाइन का विरोध करने के लिए। ऐसे में इस मामले ने एक बार फिर उस पर
प्यार का विरोधी होने का ठप्पा लगा दिया।
लेखक कहिन
हालांकि मेरे दिमाग की खुराफात कहती है सही में नाम में कुछ
नहीं रखा। जो तैमूर का विरोध कर रहे थे वो भी एक अलग तरह की भावना के तहत
कर रहे थे। और जो अब रोमियो का विरोध कर रहे हैं उनकी भी अपनी भावना है।
हां पुलिस को जो ऑर्डर मिला है उसको सही तरीके से पालन करना चाहिए। वो क्या
है यार ईस्ट दिल्ली में रहते हैं और अक्सर दोस्तों से मिलने ग़ाज़ियाबाद-
नोएडा जाना होता है।
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