आपको कैसा लगेगा अगर आप टीवी पर समाचार देख रहें है जहां 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले, राष्ट्रमंडल खेलों में हुए खेल, आदर्श घोटाले और राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दे पर बुद्धिजीवी वर्ग अपनी राय दे रहा हो। लोकसभा में विपक्ष जेपीसी की मांग कर रहा हो, जन्तर-मन्तर और रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार को लेकर रैलियां और प्रदर्शन किए जा रहें हों और अचानक आप अपने टीवी पर ब्रकिंग न्यूज देखें कि ‘प्याज के आंसू रो रही है जनता'। दिमाग चकरा जाता है कि अचानक इतने बड़े मुद्दों के बीच प्याज कहां से आ गई?
लेकिन ऐसा हर जगह हो रहा है और जो बुद्धिजीवी लोग पहले घोटालों और भ्रष्टाचार पर बोल रहे थे वही अब प्याज पर टिप्पणियां दें रहें हैं। आखिर ये प्याज है क्या .? हमने तो सुना है कि सब्जी है और शायद आपने भी। लेकिन चक्कर ये है कि अब प्याज मंहगी हो गई है। मैंने सोचा कि अब इसमें भी क्या बड़ी बात हो गई पिछले दो सालों में चीनी, चावल, आटा, दाल और सब्जियों के साथ-साथ जरूरत की सभी बुनियादी चीजें महंगी हो रही है तो प्याज पर हल्ला क्यों?
थोड़ा पीछे चलें तो ये भी समझ आ जाता है प्याज में वो ताकत है वो शक्ति है जो न तो अमेरिका के साथ हुए १२३ समझौते में थी न राष्ट्रमंडल खेल और न ही आज तक के सबसे बड़े घोटाले 2जी स्पेक्ट्रम में थी। क्योंकि ये सभी मुद्दे कितने भी बड़े हो लेकिन सरकार नहीं गिरा पाए लेकिन मालिक ये प्याज सरकार गिरा सकती है लो साहब आप तो हंस पड़े। अरे भाई हंसो मत ये प्याज ऐसा पहले भी कर चुकी है एक बार, याद है न 1998 । इसलिए इस बार सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती और इसी लिए 15 जनवरी तक प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री ने भी बयान दे कहा कि जल्द सस्ती होगी प्याज।
मेरे दिमाग में एक सवाल आया कि क्या प्याज जीवन की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी कोई सब्जी है तो जवाब है नहीं। ऐसा मै समझता हूं । क्योंकि जहां मैं रहता हूं वहा तकरीबन ऐसे दस परिवारों को जानता हूँ जो प्याज को खाने की बात तो छोड़िए साहब खरीदते तक नहीं हैं। प्याज को मुंह तक नहीं लगाते। और अगर आपने गलती से उन्हें खिला दी तो आपको मारने पर आमादा हो सकते हैं। तो प्याज बुनियादी जरूरत भी नहीं है जैसे कि आटा, दाल और अन्य कुछ सब्जियां हैं। तो प्रश्न यह है कि लोगों ने आटा, दाल और अन्य सब्जियों के महंगे होने पर तो इतना शोर नहीं मचाया जितना कि प्याज के महंगा होने पर मचाया जा रहा है। बाकायदा मुद्दा बन गया है प्याज का महंगा होना।
ऑफिस में भी जब बात छिड़ी तो पता लगा कि मासाहारी लोगों के लिए प्याज का महंगा होना और वो भी इतना महंगा होना परेशानी का सबब बन गया है। उनके खाना बनाने की लागत बढ़ गई है। तो मुद्दा थोडा समझ आया की इतना शोर क्यों है
वैसे मेरी राय में अब प्याज का मुद्दा उतना बड़ा नहीं रहा जितना कि 1998 में था। क्योंकि अभी तक मैंने लोगों कि आवाज कम और नेताओं ओए मीडिया की आवाज ज्यादा सुनी है इसका एक कारण बाबा रामदेव भी हो सकते हैं जिन्होंने प्याज को तामसिक और स्वास्थ्य के लिए हानि कारक भोजन बता कर लोगों को प्याज से दूर रहने की सलाह दी है। और 1998 का हवाला देते हुए बाबा रामदेव ने एक बार यह भी कहा था कि अगर प्याज महंगी हो गई थी तो मात्र एक महीने के लिए प्याज खाना छोड़ देते फिर देखिए पहले से भी ज्यादा सस्ती प्याज बाजार में उपलब्ध हो जाती . मुझे तो यह रास्ता पसंद है क्योंकि अगर प्याज बुनियादी जरूरत नहीं है तो ऐसा किया जा सकता है.
मुझे तो ऐसा लगता है कि यदि लोगों ने बाबा रामदेव का कहा नहीं माना तो ऐसा न हो कि ये प्याज इतनी बड़ी हो जाए कि देश में अमीर और गरीब की लड़ाई ही खत्म हो जाए और देश में दो ही वर्ग रहें एक प्याज खाने वाला (अमीर) और एक प्याज न खाने वाला (गरीब)।
क्या कहतें हैं आप ..??
Monday, December 20, 2010
Monday, November 1, 2010
दिल्ली के ठाठ
नमस्कार,
स्वागत है, आज सुबह समाचार चैनल्स पर पर नज़र डाली तो देखा की युवराज (राहुल गांधी) ने इस बार फिर मुंह खोला है और खोलते ही मुसीबत में फंस गए हैं .. इस बार उन्होंने कहा है की "बिहार चमक रहा है तो क्यों भाग रहे हैं लोग " अब इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कहा की युवराज प्रधानमन्त्री से पहले मुख्यमंत्री बन कर देखें ...
तो भाई इस पर मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा की
"भाई बिहार के लोग तो भागकर भी भारत में ही रहते हैं, लेकिन युवराज (राहुल गांधी) तो सीधे विदेश जाकर (इतना ही नहीं उनके दिवंगत पिता जी भी) पढाई करते हैं .
क्या १९४७ से आजतक कांग्रेस पार्टी ने भारत की शिक्षा के स्तर में इतनी ही तरक्की की है ..?? .
जब आप उत्तर प्रदेश से होकर भी सेंट स्टीफंस कालेज में हिंदी में फेल हो सकते हो .... तो बिहार ५ साल में चमक जाए ऐसा क्यों सोचते हैं मालिक आप ..?? आपकी सरकार ने तो १९४७ से अब तक नहीं चमकाया और जैसे ही आप के हाथ से सत्ता गयी तो आप को चमकना और चमकाना याद आ गया .. माना की वहां आपकी नहीं लालू प्रसाद यादव जी की सरकार थी लेकिन क्या सिर्फ इसलिए तब आपने कुछ नहीं कहा क्योंकि लालू जी आपकी केंद्र सरकार में सहायक की भूमिका निभा रहे थे ...
ऐसा भी नहीं है की बिहार से झारखंड अलग होने के बाद बिहार की सारी संपदा चली गयी.. हाँ कुछ हद तक यह जरूर सही है पर पूरी तरह नहीं , भाई कोई ये बताये की बिहार में जो खनिज सम्पदा है उससे बिहार की तरक्की का रास्ता खोजने की बजाय उसकी सारी संपदा से आने वाला पैसा तो आपकी केंद्र सरकार दिल्ली में लगा देती है और दिल्ली भी वो जो उत्पादन के नाम पर जीरो है कुछ भी नहीं कमाती न ही कुछ पैदा करती है दिल्ली में ऐसा क्या है की सब कुछ झोंक देने के बाद भी आपकी केंद्र सरकार दिल्ली को नंबर एक का राज्य नहीं बना पायी, जबकि दिल्ली इतनी छोटी है की अगर आप चाहें तो ५ साल में इसकी काया पलट कर सकते हैं पर काया पलटने के नाम पर भी यहाँ क्या हुआ है देख लीजिये पूरा का पूरा राष्ट्रमंडल खेल २०१० इसकी कहानी गा नहीं रहा बल्कि चीख-चीख कर बता रहा है यहाँ राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर केंद्र सरकार और उसके मंत्री अपने घर भर लेते है जिसमें ऊपर से नीचे तक सब शामिल है प्रधानमन्त्री और पार्टी अध्यक्ष मैडम जी भी कोई जवाब नहीं देते .. ये किसकी गलती है ..?? ?
क्या कलमाड़ी महोदय की इतनी औकात है की वो सिर्फ एक एमपी होकर इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकें.. पर छोड़िये साहब अभी बात बिहार की है तो बिहार की कहानी ये है की वहां जितनी अंधेर गर्दी लालू जी ने की थी उतनी तो शायद कोई कर ही नहीं सकता और करेगा भी तो पकड़ा जायेगा , लेकिन ये तो लालू जी की ही महिमा है की आज भी खुले आम घूमते है और बाकायदा चुनाव भी लड़ते है.. बाकी ज्यादा क्या कहें भैया .. सब मीडिया की माया है आज कल तो .. जिसने राजेश खन्ना के उस गाने को झूठा साबित कर दिया " ये पब्लिक है ये सब जानती है पब्लिक है" अब तो भैया कहानी ये है की जो मीडिया दिखाता है पब्लिक भी वही मानती है और मेरे एक मित्र को इसका एकदम निजी अनुभव है .. क्योंकि अब लोग कहते हैं की भैया दिखावे है तो सच ही होता होगा ..?? और बाकी चुनाव शुरू हो ही गए हैं फैसला आ जायेगा की कौन क्या चाहता है ??
और भाइयों वैसे भी ये हाल सिर्फ बिहार का नहीं है ये हाल है बिहार, झारखण्ड और उड़ीसा सहित अन्य कई राज्यों का है जो संपदा और कई अन्य मामलों में दिल्ली से कहीं ज्यादा अमीर हैं लेकिन बस दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी होने की कीमत चुका रहे हैं ...
धन्यवाद
जरूर पढ़ें और प्रतिक्रिया और सुझाव दोनों दे
स्वागत है, आज सुबह समाचार चैनल्स पर पर नज़र डाली तो देखा की युवराज (राहुल गांधी) ने इस बार फिर मुंह खोला है और खोलते ही मुसीबत में फंस गए हैं .. इस बार उन्होंने कहा है की "बिहार चमक रहा है तो क्यों भाग रहे हैं लोग " अब इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कहा की युवराज प्रधानमन्त्री से पहले मुख्यमंत्री बन कर देखें ...
तो भाई इस पर मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा की
"भाई बिहार के लोग तो भागकर भी भारत में ही रहते हैं, लेकिन युवराज (राहुल गांधी) तो सीधे विदेश जाकर (इतना ही नहीं उनके दिवंगत पिता जी भी) पढाई करते हैं .
क्या १९४७ से आजतक कांग्रेस पार्टी ने भारत की शिक्षा के स्तर में इतनी ही तरक्की की है ..?? .
जब आप उत्तर प्रदेश से होकर भी सेंट स्टीफंस कालेज में हिंदी में फेल हो सकते हो .... तो बिहार ५ साल में चमक जाए ऐसा क्यों सोचते हैं मालिक आप ..?? आपकी सरकार ने तो १९४७ से अब तक नहीं चमकाया और जैसे ही आप के हाथ से सत्ता गयी तो आप को चमकना और चमकाना याद आ गया .. माना की वहां आपकी नहीं लालू प्रसाद यादव जी की सरकार थी लेकिन क्या सिर्फ इसलिए तब आपने कुछ नहीं कहा क्योंकि लालू जी आपकी केंद्र सरकार में सहायक की भूमिका निभा रहे थे ...
ऐसा भी नहीं है की बिहार से झारखंड अलग होने के बाद बिहार की सारी संपदा चली गयी.. हाँ कुछ हद तक यह जरूर सही है पर पूरी तरह नहीं , भाई कोई ये बताये की बिहार में जो खनिज सम्पदा है उससे बिहार की तरक्की का रास्ता खोजने की बजाय उसकी सारी संपदा से आने वाला पैसा तो आपकी केंद्र सरकार दिल्ली में लगा देती है और दिल्ली भी वो जो उत्पादन के नाम पर जीरो है कुछ भी नहीं कमाती न ही कुछ पैदा करती है दिल्ली में ऐसा क्या है की सब कुछ झोंक देने के बाद भी आपकी केंद्र सरकार दिल्ली को नंबर एक का राज्य नहीं बना पायी, जबकि दिल्ली इतनी छोटी है की अगर आप चाहें तो ५ साल में इसकी काया पलट कर सकते हैं पर काया पलटने के नाम पर भी यहाँ क्या हुआ है देख लीजिये पूरा का पूरा राष्ट्रमंडल खेल २०१० इसकी कहानी गा नहीं रहा बल्कि चीख-चीख कर बता रहा है यहाँ राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर केंद्र सरकार और उसके मंत्री अपने घर भर लेते है जिसमें ऊपर से नीचे तक सब शामिल है प्रधानमन्त्री और पार्टी अध्यक्ष मैडम जी भी कोई जवाब नहीं देते .. ये किसकी गलती है ..?? ?
क्या कलमाड़ी महोदय की इतनी औकात है की वो सिर्फ एक एमपी होकर इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकें.. पर छोड़िये साहब अभी बात बिहार की है तो बिहार की कहानी ये है की वहां जितनी अंधेर गर्दी लालू जी ने की थी उतनी तो शायद कोई कर ही नहीं सकता और करेगा भी तो पकड़ा जायेगा , लेकिन ये तो लालू जी की ही महिमा है की आज भी खुले आम घूमते है और बाकायदा चुनाव भी लड़ते है.. बाकी ज्यादा क्या कहें भैया .. सब मीडिया की माया है आज कल तो .. जिसने राजेश खन्ना के उस गाने को झूठा साबित कर दिया " ये पब्लिक है ये सब जानती है पब्लिक है" अब तो भैया कहानी ये है की जो मीडिया दिखाता है पब्लिक भी वही मानती है और मेरे एक मित्र को इसका एकदम निजी अनुभव है .. क्योंकि अब लोग कहते हैं की भैया दिखावे है तो सच ही होता होगा ..?? और बाकी चुनाव शुरू हो ही गए हैं फैसला आ जायेगा की कौन क्या चाहता है ??
और भाइयों वैसे भी ये हाल सिर्फ बिहार का नहीं है ये हाल है बिहार, झारखण्ड और उड़ीसा सहित अन्य कई राज्यों का है जो संपदा और कई अन्य मामलों में दिल्ली से कहीं ज्यादा अमीर हैं लेकिन बस दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी होने की कीमत चुका रहे हैं ...
धन्यवाद
जरूर पढ़ें और प्रतिक्रिया और सुझाव दोनों दे
Saturday, October 30, 2010
बस कुछ यूँही
बात एमटीवी के एक रियलिटी शो की है शो में आये प्रतिभागी रात के समय जंगल में कैंप लगा कर आग जला बात-चीत या यों कहें की प्रश्न-उत्तर का दौर चल रहा था प्रश्न करने का तरीका था की एक पर्ची पर प्रश्न लिखें और सभी पर्चियों को इकठ्ठा कर लिया गया है उनमें से किसी एक पर्ची में प्रश्न था की 'आर यू विर्जिन' ??? सब चौंक गए सबसे ज्यादा वो जिससे यह प्रश्न था प्रश्न भी एक लड़की से था तो शर्म आना स्वाभाविक है लेकिन सभी प्रतिभागी अविवाहित थे तो इस प्रश्न का औचित्य क्या है ??? अब जवाब सुनिए जवाब था की यह प्रश्न निजी जिन्दगी से जुदा है और जवाब नहीं दिया लेकिन वहां बहस शुरू हो गयी की आखिर सच क्या है?? लेकिन हैरानी इस बात की है की जिससे सवाल था उसने एक बार भी यह नहीं कहा की 'आई एम विर्जिन' अब बाकी बहस से हमें मतलब नहीं है .
सवाल यह है की क्या आज सच में सेक्स और विर्जिनिटी जैसी बातें समाज के लोगों का 'स्टेटस' तय करती हैं क्या सच में यदि कोई यह कहता है की वो विर्जिन है तो उसे पिछड़ा या यूँ कहें की बक्वार्ड माना जाता है इस रियलिटी शो से तो ऐसा ही लगता है और ये रियलिटी शो युवाओं का सबसे पसंदीदा शो है। जिसमें जम के गालियाँ दी जाती है हाँ यह ठीक है की सन्सर अब्यूस होने की वजह से टीवी पर बीप के रूप में सुनाई देती है लेकिन समझ में आ जाता है की कौन सी गाली दी गयी है।
आज हमारे समाज में कुछ ऐसी चीज़े शामिल हो गयी है की उन्हें निगलना मुश्किल हो रहा है क्या मोडर्न होने का पैमाना सिर्फ सेक्स या वो पहनावा है जिसमें पहनने वाले और देखने वाला दोनों को अजीब लगता हो ??? कुछ जगहों को छोड़ दें तो मोडर्न पहनावा ऐसा है की मध्यमवर्गीय लड़ियों को पहनने में संकोच तो होता है लेकिन वो भी मोडर्न बनने की रेस में पिछड़ न जाएँ तो वो भी लगी हुयी हैं इस रेस मैं, इस झूठी मोड़ेर्निटी को अपनाने में । मैं यह नहीं कहूँगा की आधुनिक पहनावा पूरी तरह से अस्वीकार कर दो। लेकिन आप ऐसा तो पहनिए की देखने में अच्छा लगे और बताने में भी आपको इज्जत मिले, और आपको अपनी नज़रें न झुकानी पड़े।
ऐसे ही भाषा का इस्तेमाल भी जिस प्रकार हो रहा है वो तो और कमाल और अजब- गजब है क्योंकि आज कल एक चीज़ जो प्रचलन में है की अंग्रेजी में गालियाँ दो तो कोई बुरा नहीं मानता । आम तौर पर देखने में आता है की बास्टर्ड, फक, सक, और अन्य कई शब्द ऐसे हैं जो धड़ल्ले से प्रयोग में आते हैं। इससे भी ज्यादा कमाल तो इस बात का है की लड़का हो या लड़की इन गालियों का कोई बुरा नहीं मानता। और न ही अंग्रेजी में गाली देने में परहेज़ करता है लेकिन यदि एक भी गाली हिंदी में दे दी तो भाई साहब भगवन कसम आप बक्वार्ड तो बन ही जाओगे साथ साथ पुलिस केस भी हो सकता है इसमें कोई शक नहीं है। अब ऐसा सिर्फ लड़कियों के साथ नहीं हैं बल्कि लड़के तो पहले से इन सब चीजों के लिए बदनाम हैं । अभी हाल ही में साहित्यकारों ने एक-दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाये सिर्फ भाषा को लेकर और भाषा वो जिसकी पूरक गालियाँ हो। यहाँ तक की लेखिकाओं के लिए छिनाल शब्द तक का प्रयोग किया गया अब न जाने समाज में कौन सी भाषा स्थान लेने जा रही है???
वैसे भी आज देश में अंग्रेजी पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया जा रहा है आज हमारे समाज में अंग्रेजी का हाल कुछ ऐसा है जैसा की नए जूते का होता है मतलब हम नए जूते को तब तक रगड़-रगड़ कर पहनते है जब तक उसकी माँ बहन न कर दें । ऐसे ही अंग्रेजी का एक शब्द सीखते ही उसको इतनी बार प्रयोग में लाते है की जब तक सारे दोस्त गाली न देने लगें या ये न कहने लगें की भाई इस शब्द को माफ़ कर दे। अब जैसे मैं खुद ही कुछ शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा करता हूँ जिनमे अल्टीमेट, क्लासिक और भी कुछ शब्द हैं और हाँ ऊपर एक जगह मैंने गाली दी है लेकिन दिल्ली का हूँ न तो पता ही नहीं चला की गालियाँ देना कब सीख लिया गालियाँ दिल्ली की स्पेसिलिटी मानी जाती है ओर्र सच तो ये है की लेख सबको पढाना है वरना शायद इसमें गालियों की मात्रा ज्यादा भी हो सकती थी दिल्ली में आपको और कुछ आता हो या न लेकिन वाक्यों में हेल्पिंग वर्ब की तरह गालियों का प्रयोग जरुर आता है।
और सच कहू तो मैं भी इस सब से बाहर नहीं हूँ लेकिन बस लिख रहा हूँ , बस कुछ यूँही
सवाल यह है की क्या आज सच में सेक्स और विर्जिनिटी जैसी बातें समाज के लोगों का 'स्टेटस' तय करती हैं क्या सच में यदि कोई यह कहता है की वो विर्जिन है तो उसे पिछड़ा या यूँ कहें की बक्वार्ड माना जाता है इस रियलिटी शो से तो ऐसा ही लगता है और ये रियलिटी शो युवाओं का सबसे पसंदीदा शो है। जिसमें जम के गालियाँ दी जाती है हाँ यह ठीक है की सन्सर अब्यूस होने की वजह से टीवी पर बीप के रूप में सुनाई देती है लेकिन समझ में आ जाता है की कौन सी गाली दी गयी है।
आज हमारे समाज में कुछ ऐसी चीज़े शामिल हो गयी है की उन्हें निगलना मुश्किल हो रहा है क्या मोडर्न होने का पैमाना सिर्फ सेक्स या वो पहनावा है जिसमें पहनने वाले और देखने वाला दोनों को अजीब लगता हो ??? कुछ जगहों को छोड़ दें तो मोडर्न पहनावा ऐसा है की मध्यमवर्गीय लड़ियों को पहनने में संकोच तो होता है लेकिन वो भी मोडर्न बनने की रेस में पिछड़ न जाएँ तो वो भी लगी हुयी हैं इस रेस मैं, इस झूठी मोड़ेर्निटी को अपनाने में । मैं यह नहीं कहूँगा की आधुनिक पहनावा पूरी तरह से अस्वीकार कर दो। लेकिन आप ऐसा तो पहनिए की देखने में अच्छा लगे और बताने में भी आपको इज्जत मिले, और आपको अपनी नज़रें न झुकानी पड़े।
ऐसे ही भाषा का इस्तेमाल भी जिस प्रकार हो रहा है वो तो और कमाल और अजब- गजब है क्योंकि आज कल एक चीज़ जो प्रचलन में है की अंग्रेजी में गालियाँ दो तो कोई बुरा नहीं मानता । आम तौर पर देखने में आता है की बास्टर्ड, फक, सक, और अन्य कई शब्द ऐसे हैं जो धड़ल्ले से प्रयोग में आते हैं। इससे भी ज्यादा कमाल तो इस बात का है की लड़का हो या लड़की इन गालियों का कोई बुरा नहीं मानता। और न ही अंग्रेजी में गाली देने में परहेज़ करता है लेकिन यदि एक भी गाली हिंदी में दे दी तो भाई साहब भगवन कसम आप बक्वार्ड तो बन ही जाओगे साथ साथ पुलिस केस भी हो सकता है इसमें कोई शक नहीं है। अब ऐसा सिर्फ लड़कियों के साथ नहीं हैं बल्कि लड़के तो पहले से इन सब चीजों के लिए बदनाम हैं । अभी हाल ही में साहित्यकारों ने एक-दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाये सिर्फ भाषा को लेकर और भाषा वो जिसकी पूरक गालियाँ हो। यहाँ तक की लेखिकाओं के लिए छिनाल शब्द तक का प्रयोग किया गया अब न जाने समाज में कौन सी भाषा स्थान लेने जा रही है???
वैसे भी आज देश में अंग्रेजी पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया जा रहा है आज हमारे समाज में अंग्रेजी का हाल कुछ ऐसा है जैसा की नए जूते का होता है मतलब हम नए जूते को तब तक रगड़-रगड़ कर पहनते है जब तक उसकी माँ बहन न कर दें । ऐसे ही अंग्रेजी का एक शब्द सीखते ही उसको इतनी बार प्रयोग में लाते है की जब तक सारे दोस्त गाली न देने लगें या ये न कहने लगें की भाई इस शब्द को माफ़ कर दे। अब जैसे मैं खुद ही कुछ शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा करता हूँ जिनमे अल्टीमेट, क्लासिक और भी कुछ शब्द हैं और हाँ ऊपर एक जगह मैंने गाली दी है लेकिन दिल्ली का हूँ न तो पता ही नहीं चला की गालियाँ देना कब सीख लिया गालियाँ दिल्ली की स्पेसिलिटी मानी जाती है ओर्र सच तो ये है की लेख सबको पढाना है वरना शायद इसमें गालियों की मात्रा ज्यादा भी हो सकती थी दिल्ली में आपको और कुछ आता हो या न लेकिन वाक्यों में हेल्पिंग वर्ब की तरह गालियों का प्रयोग जरुर आता है।
और सच कहू तो मैं भी इस सब से बाहर नहीं हूँ लेकिन बस लिख रहा हूँ , बस कुछ यूँही
Tuesday, October 19, 2010
राजनितिक जातिवाद
सुबह की सैर करते समय जब कुछ दोस्त मिले तो बात शुरु हुई और बात भी प्रत्येक भारतीय की तरह राजनीति से, तभी एक दोस्त ने दुसरे को निशाना बनाते हुए कहा की यार इसका क्या है इसका बाप तो नेता है नौकरी और छोकरी दोनों आराम से मिल जाएगी. तो दूसरा बोला की हाँ मिल जाएगी तू भी नेता बन जा और करले शादी,. इसी बहस में एक विषय आया की क्या नेताओं की एक अलग जाति नहीं होनी चाहिए. जैसे समाज में ब्राह्मण हैं, क्षत्रिय हैं, वैश्य हैं , शूद्र हैं और जैसे ये चारों एक-दुसरे की जाति में शादी नहीं करते वैसे ही नेताओं को भी नहीं करनी चाहिए. वैसे होता तो राजनीति में भी कुछ-कुछ ऐसा ही है.
जैसे अब देखें तो पता चलता है की कांग्रेस और बीजेपी के लोग आपस में शादी नहीं कर सकते उसी तरह सपा और बसपा के लोग भी आपस में शादी नहीं कर सकते उसके बाद लेफ्ट है , जदयू है, लोजपा है, और अन्य कई राजनीतिक पार्टियाँ है .
अब जरा देखें की इनमे गोत्र के नाम कैसे होंगे.:-
कांग्रेस :-
इसमें सबसे पहला गोत्र होगा श्रद्धेय महात्मा गांधी जी जिनके नाम से ये वंस पहचाना जाता है इसके बाद इसकी कुछ शाखाएं होंगी जैसे जवाहर लाल नेहरु , उनके बाद इंदिरा गाँधी की किसी भी जाति में महिला के नाम से गोत्र बनाने वाली पहली महिला के रूप में भी जानी जाएँगी., उनके बाद राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी .
बीजेपी :-
इस जाति के प्रवर्तक श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी को पहला गोत्र उन्ही के नाम से बनेगा. उसके बाद लाल कृष्ण आडवाणी , प्रमोद महाजन, अरुण जेटली , शुषमा स्वराज और अंत में वरुण गाँधी का नाम आएगा .
लेफ्ट :-
इनके जनक बुद्धदेव भट्टाचार्य होंगे इन्ही के नाम से गोत्र चलेगा उसके बाद प्रकाश करात और वृंदा करात का नाम आएगा.
जदयू :- इस पार्टी का गोत्र नितीश कुमार के नाम से चलेगा.
एन सी पी :- इस पार्टी का गोत्र शरद पवार के नाम से चलेगा.
बसपा :- इस पार्टी का गोत्र मायावती के नाम से चलेगा .
सपा :- इस पार्टी का गोत्र मुलायम सिंह यादव के नाम से चलेगा
डी एम के :- इस पार्टी का गोत्र करूणानिधि के नाम से चलेगा
ए आइ डी एम के :- इस पार्टी का गोत्र जय ललिता के नाम से चलेगा
लोजपा :- इस पार्टी का गोत्र राम विलास पासवान के नाम से चलेगा
टी एम सी :- इस पार्टी का गोत्र ममता बनर्जी के नाम से चलेगा
आर जे डी :- इस पार्टी का गोत्र लालू प्रसाद यादव और रबरी देवी के नाम से चलेगा
अब एक नज़र डालते हैं की इन नव निर्मित जातियों में कौन सी जाति किस जाति में शादी कर सकती है :-
बीजेपी जिन जातियों में रिश्ता कर सकती है वो हैं ए आइ डी एम के , जदयू , बसपा इसके अलावा कोई भी राजनितिक जाति बीजेपी में रिश्ता नहीं करेगी
दूसरी और कांग्रेस कहीं भी रिश्ता कर सकती है पर बीजेपी में नही .... इसी प्रकार लेफ्ट भी कहीं भी रिश्ता करेगी पर बीजेपी में नहीं. बसपा को कहीं भी जाने में कोई परेशानी नहीं है बस फायदा होना चाहिए. सपा, एन सी पी, और लोजपा भी फायदे के लिए कहीं भी रिश्ता करने को तैयार हो जाते हैं.
कमाल की बात तो यह है की यहाँ भी दहेज़ खूब चलता है.. और आम समाज की तरह लाखों में नहीं यहाँ हिस्साब करोड़ों और अरबों में होता है.
यहाँ भी अंतर जातीय विवाह होता है और आगे भी होता रहेगा पर देखना ये है की क्या इससे यहाँ भी ऑनर किलिंग जैसी समस्या सर उठाएगी या यहाँ भी हर कहीं की तरह राजनीति ही सब पर भारी रहेगी ...???
जैसे अब देखें तो पता चलता है की कांग्रेस और बीजेपी के लोग आपस में शादी नहीं कर सकते उसी तरह सपा और बसपा के लोग भी आपस में शादी नहीं कर सकते उसके बाद लेफ्ट है , जदयू है, लोजपा है, और अन्य कई राजनीतिक पार्टियाँ है .
अब जरा देखें की इनमे गोत्र के नाम कैसे होंगे.:-
कांग्रेस :-
इसमें सबसे पहला गोत्र होगा श्रद्धेय महात्मा गांधी जी जिनके नाम से ये वंस पहचाना जाता है इसके बाद इसकी कुछ शाखाएं होंगी जैसे जवाहर लाल नेहरु , उनके बाद इंदिरा गाँधी की किसी भी जाति में महिला के नाम से गोत्र बनाने वाली पहली महिला के रूप में भी जानी जाएँगी., उनके बाद राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी .
बीजेपी :-
इस जाति के प्रवर्तक श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी को पहला गोत्र उन्ही के नाम से बनेगा. उसके बाद लाल कृष्ण आडवाणी , प्रमोद महाजन, अरुण जेटली , शुषमा स्वराज और अंत में वरुण गाँधी का नाम आएगा .
लेफ्ट :-
इनके जनक बुद्धदेव भट्टाचार्य होंगे इन्ही के नाम से गोत्र चलेगा उसके बाद प्रकाश करात और वृंदा करात का नाम आएगा.
जदयू :- इस पार्टी का गोत्र नितीश कुमार के नाम से चलेगा.
एन सी पी :- इस पार्टी का गोत्र शरद पवार के नाम से चलेगा.
बसपा :- इस पार्टी का गोत्र मायावती के नाम से चलेगा .
सपा :- इस पार्टी का गोत्र मुलायम सिंह यादव के नाम से चलेगा
डी एम के :- इस पार्टी का गोत्र करूणानिधि के नाम से चलेगा
ए आइ डी एम के :- इस पार्टी का गोत्र जय ललिता के नाम से चलेगा
लोजपा :- इस पार्टी का गोत्र राम विलास पासवान के नाम से चलेगा
टी एम सी :- इस पार्टी का गोत्र ममता बनर्जी के नाम से चलेगा
आर जे डी :- इस पार्टी का गोत्र लालू प्रसाद यादव और रबरी देवी के नाम से चलेगा
अब एक नज़र डालते हैं की इन नव निर्मित जातियों में कौन सी जाति किस जाति में शादी कर सकती है :-
बीजेपी जिन जातियों में रिश्ता कर सकती है वो हैं ए आइ डी एम के , जदयू , बसपा इसके अलावा कोई भी राजनितिक जाति बीजेपी में रिश्ता नहीं करेगी
दूसरी और कांग्रेस कहीं भी रिश्ता कर सकती है पर बीजेपी में नही .... इसी प्रकार लेफ्ट भी कहीं भी रिश्ता करेगी पर बीजेपी में नहीं. बसपा को कहीं भी जाने में कोई परेशानी नहीं है बस फायदा होना चाहिए. सपा, एन सी पी, और लोजपा भी फायदे के लिए कहीं भी रिश्ता करने को तैयार हो जाते हैं.
कमाल की बात तो यह है की यहाँ भी दहेज़ खूब चलता है.. और आम समाज की तरह लाखों में नहीं यहाँ हिस्साब करोड़ों और अरबों में होता है.
यहाँ भी अंतर जातीय विवाह होता है और आगे भी होता रहेगा पर देखना ये है की क्या इससे यहाँ भी ऑनर किलिंग जैसी समस्या सर उठाएगी या यहाँ भी हर कहीं की तरह राजनीति ही सब पर भारी रहेगी ...???
Sunday, July 18, 2010
खाप बोले : आई हेट लव स्टोरी
इमरान खान और सोनम कपूर अभिनीत फिल्म आई हेट लव स्टोरी बाक्स आफिश पर भले ही धमाल मचा रही हो लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहाँ फिल्म की कहानी, अभिनेता और अभिनेत्री से शायद ही कुछ लेना- देना हो, लेकिन फिल्म का नाम उन्हें खूब रास आ रहा है, और वो जगह है खाप पंचायत। आज पूरा देश और समाज खाप पंचायत, ऑनर किलिंग अर्थात इज्जत बचने के नाम पर क़त्ल को लेकर दो फाड़ होता नज़र आ रहा है। कोई गलत कहता है तो कोई सही बताता है। असल में ऑनर किलिंग है क्या ??? हिन्दू संस्कृति के अनुसार वर- वधु का गोत्र यदि एक है तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वे भाई- बहन या उनके बीच कुछ ऐसा रिश्ता होगा जिससे उन दोनों का विवाह नहीं हो सकता।
दूसरा पक्ष यह है की शादी करने वाले शादी बिना घर वालों की इच्छा से कर रहे हैं। अभी तक जितनी भी शादियाँ हुई है उनमें अधिकतर में सिर्फ लड़के और लड़की की ही सहमती थी। दोनों मेंसे किसी के परिवार की भी सहमती नहीं थी। तो ऐसे में खाप का काम है की वह शादी करने वालों पर सामाजिक दबाव बनाये की वह शादी न हो। लेकिन शादियाँ होती हैं और फिर होती है ऑनर किलिंग यानी इज्जत के नाम पर ऑनर किलिंग यानि हत्या। कानून के अनुसार शादी के लिए आपको बालिक होना जरुरी है लेकिन कानून में गोत्र विवाद पर कुछ नहीं है लेकिन हमारी संस्कृति में यह मान्य नहीं है। यह भी देखें यह बात वैज्ञानिकों के द्वारा प्रमाणित है की जिस तरह पति- पत्नी का एक ब्लड ग्रुप होने पर उनके होने वाले बच्चों में विकार आने की संभावनाएं औरों की अपेक्षा ज्यादा होती है। उसी प्रकार एक गोत्र होने पर भी विकार की संभावनाएं होती हैं। अब जो लोग ऑनर किलिंग का विरोध कर रहे हैं उनका कहना है की यदि उनके बच्चों में विकार आता है तो इससे समाज को क्या ????? ये उनका अपना सर दर्द है।
एक नज़र उस परिवार की तरफ भी देखें जो एक गोत्र में विवाह के पक्ष में तो नहीं हैं परन्तु अगर वे बच्चों के प्यार में आकर शादी कर भी दी और अब उनके वंश को आगे बढ़ाने वाले बच्चों में यदि विकार आ जाये तो उनकी क्या स्थिति होगी। बच्चों के लिए समाज से बैर लिया और अब उनका वंश बढाने वाले बच्चों में विकार आ जाये तो क्या वे अपने बच्चों को पहले जैसा प्यार दे पाएंगे जिन्होंने उनकी विवाह संबंद्धि बात नहीं मानी।
एक और बात ऑनर किलिंग को गैर कानूनी माना है और मानना भी चाहिए क्योंकि आप सिर्फ इसलिए किसी की हत्या नहीं कर सकते की आपकी इज्जत का सवाल है। परन्तु उन माता-पिता का क्या करें जो अपना खून पसीना लगाकर प्यार से पाल- पोश कर बड़ा करें और बच्चें उन्ही की इज्जत पर बट्टा लगा दें , और समाज में माता पिता का उठाना बैठना दूभर हो जाये।
एक पुराणी कहावत है ;
एक बाप को यह हक है की जो घर उसने बनाया उसे जला कर राख कर दे ख़त्म कर दे "
यह लाइन ऑनर किलिंग को बढ़ावा देती नज़र आती है ऐसा ऊपर से प्रतीत होता है परन्तु इसके भीतर उस पिता के दर्द को देखना होगा जिसने खून पसीने और परिश्रम से बनाये अपने ही घर को आग लगनी पड़ी। आखिर ऐसा क्या हुआ जो उसे ऐसा करना पड़ा
एक सवाल और की क्या कानून और ऑनर किलिंग का विरोध करने वालों को ऑनर किलिंग में मारे गए लोगों की मौत का दुःख उनके परिवार से ज्यादा हो सकता है ????? चाहे उनकी हत्या उनके अपने परिवार वालों ने ही की है।
भारतीय या हिन्दू संस्कृति कोई इतनी छोटी नही है की उसमे इस समस्या का समाधान न हो बस थोडा ध्यान देने की जरूरत है। और ऑनर किलिंग जैसी खतरनाक समस्या से बचा जा सकता है। जो समाज को बांटने का काम कर रही है।
दूसरा पक्ष यह है की शादी करने वाले शादी बिना घर वालों की इच्छा से कर रहे हैं। अभी तक जितनी भी शादियाँ हुई है उनमें अधिकतर में सिर्फ लड़के और लड़की की ही सहमती थी। दोनों मेंसे किसी के परिवार की भी सहमती नहीं थी। तो ऐसे में खाप का काम है की वह शादी करने वालों पर सामाजिक दबाव बनाये की वह शादी न हो। लेकिन शादियाँ होती हैं और फिर होती है ऑनर किलिंग यानी इज्जत के नाम पर ऑनर किलिंग यानि हत्या। कानून के अनुसार शादी के लिए आपको बालिक होना जरुरी है लेकिन कानून में गोत्र विवाद पर कुछ नहीं है लेकिन हमारी संस्कृति में यह मान्य नहीं है। यह भी देखें यह बात वैज्ञानिकों के द्वारा प्रमाणित है की जिस तरह पति- पत्नी का एक ब्लड ग्रुप होने पर उनके होने वाले बच्चों में विकार आने की संभावनाएं औरों की अपेक्षा ज्यादा होती है। उसी प्रकार एक गोत्र होने पर भी विकार की संभावनाएं होती हैं। अब जो लोग ऑनर किलिंग का विरोध कर रहे हैं उनका कहना है की यदि उनके बच्चों में विकार आता है तो इससे समाज को क्या ????? ये उनका अपना सर दर्द है।
एक नज़र उस परिवार की तरफ भी देखें जो एक गोत्र में विवाह के पक्ष में तो नहीं हैं परन्तु अगर वे बच्चों के प्यार में आकर शादी कर भी दी और अब उनके वंश को आगे बढ़ाने वाले बच्चों में यदि विकार आ जाये तो उनकी क्या स्थिति होगी। बच्चों के लिए समाज से बैर लिया और अब उनका वंश बढाने वाले बच्चों में विकार आ जाये तो क्या वे अपने बच्चों को पहले जैसा प्यार दे पाएंगे जिन्होंने उनकी विवाह संबंद्धि बात नहीं मानी।
एक और बात ऑनर किलिंग को गैर कानूनी माना है और मानना भी चाहिए क्योंकि आप सिर्फ इसलिए किसी की हत्या नहीं कर सकते की आपकी इज्जत का सवाल है। परन्तु उन माता-पिता का क्या करें जो अपना खून पसीना लगाकर प्यार से पाल- पोश कर बड़ा करें और बच्चें उन्ही की इज्जत पर बट्टा लगा दें , और समाज में माता पिता का उठाना बैठना दूभर हो जाये।
एक पुराणी कहावत है ;
एक बाप को यह हक है की जो घर उसने बनाया उसे जला कर राख कर दे ख़त्म कर दे "
यह लाइन ऑनर किलिंग को बढ़ावा देती नज़र आती है ऐसा ऊपर से प्रतीत होता है परन्तु इसके भीतर उस पिता के दर्द को देखना होगा जिसने खून पसीने और परिश्रम से बनाये अपने ही घर को आग लगनी पड़ी। आखिर ऐसा क्या हुआ जो उसे ऐसा करना पड़ा
एक सवाल और की क्या कानून और ऑनर किलिंग का विरोध करने वालों को ऑनर किलिंग में मारे गए लोगों की मौत का दुःख उनके परिवार से ज्यादा हो सकता है ????? चाहे उनकी हत्या उनके अपने परिवार वालों ने ही की है।
भारतीय या हिन्दू संस्कृति कोई इतनी छोटी नही है की उसमे इस समस्या का समाधान न हो बस थोडा ध्यान देने की जरूरत है। और ऑनर किलिंग जैसी खतरनाक समस्या से बचा जा सकता है। जो समाज को बांटने का काम कर रही है।
Tuesday, July 13, 2010
भारत नादान बालक या बेवकूफ युवा..???
यूपीऐ २ की दुसरे कार्यकाल के प्रथमवर्ष के पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री जी का यह बयान की पाकिस्तान से बात चलती रहनी चाहिए और पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते बेहद जरूरी है अच्छे भविष्य के लिए सरकार की यह सोच न जाने कौन से बेहतर भविष्य की और निहार रही है... स्वतंत्रता के बाद ६२ वर्षों के इतिहास पाकिस्तान ने पीठ पर वार करने के और भारत विरोधी आतंकवाद के उत्पादन के अलावा किया क्या है... ???? इन ६२ वर्षों में पाकिस्तान ने और कुछ किया हो या न किया हो पर भारत को निरंतर तोड़ने , नुक्सान पहुचाने के अपने विचार को मजबूती जरूर प्रदान की है...
इस परिस्थिति के बाद भी भारत सरकार न जाने क्यों घुटने टेक बात-चीत जारी रखना चाहती है हमारे सामने किसी भी क्षेत्र में न टिकने वाला पकिस्तान आज हमें हर प्रकार से चुनौती देता है,॥ और हम बात-चीत चाहते है आखिर क्यों..???? एक ब्रिटिश सर्वे के अनुसार बच्चों के लिए थोड़ी बहुत धौंस जरुरी है... अर्थात जो बच्चे जैसे के साथ तैसा व्यवहार करते है.. उन बच्चों में बड़े होने पर कठिन परिस्थितियों से निबटने की अच्छी समझ होती है...
अब यदि भारत बच्चा है तो भारत को अपने स्वभाव में बदलाव लाने की जरुरत है जैसा की आज चीन, ईरान,अमेरिका और पाकिस्तान जैसे देशों का है। ... ये देश अपने लिए खतरा देख उसे ख़त्म करने में विश्वास रखते है न की खतरा सर पर आ जाने पर समाधान ढूँढने निकलते है।
और यदि भारत युवा है तो इसे अपने बालपन की गलतियों से सबक ले आगे कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है । तभी सही मायने मैं देश के सफल भविष्य का निर्माण हो पायेगा .....
फैसला आप कीजिये...?????
धन्यवाद
इस परिस्थिति के बाद भी भारत सरकार न जाने क्यों घुटने टेक बात-चीत जारी रखना चाहती है हमारे सामने किसी भी क्षेत्र में न टिकने वाला पकिस्तान आज हमें हर प्रकार से चुनौती देता है,॥ और हम बात-चीत चाहते है आखिर क्यों..???? एक ब्रिटिश सर्वे के अनुसार बच्चों के लिए थोड़ी बहुत धौंस जरुरी है... अर्थात जो बच्चे जैसे के साथ तैसा व्यवहार करते है.. उन बच्चों में बड़े होने पर कठिन परिस्थितियों से निबटने की अच्छी समझ होती है...
अब यदि भारत बच्चा है तो भारत को अपने स्वभाव में बदलाव लाने की जरुरत है जैसा की आज चीन, ईरान,अमेरिका और पाकिस्तान जैसे देशों का है। ... ये देश अपने लिए खतरा देख उसे ख़त्म करने में विश्वास रखते है न की खतरा सर पर आ जाने पर समाधान ढूँढने निकलते है।
और यदि भारत युवा है तो इसे अपने बालपन की गलतियों से सबक ले आगे कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है । तभी सही मायने मैं देश के सफल भविष्य का निर्माण हो पायेगा .....
फैसला आप कीजिये...?????
धन्यवाद
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