बात एमटीवी के एक रियलिटी शो की है शो में आये प्रतिभागी रात के समय जंगल में कैंप लगा कर आग जला बात-चीत या यों कहें की प्रश्न-उत्तर का दौर चल रहा था प्रश्न करने का तरीका था की एक पर्ची पर प्रश्न लिखें और सभी पर्चियों को इकठ्ठा कर लिया गया है उनमें से किसी एक पर्ची में प्रश्न था की 'आर यू विर्जिन' ??? सब चौंक गए सबसे ज्यादा वो जिससे यह प्रश्न था प्रश्न भी एक लड़की से था तो शर्म आना स्वाभाविक है लेकिन सभी प्रतिभागी अविवाहित थे तो इस प्रश्न का औचित्य क्या है ??? अब जवाब सुनिए जवाब था की यह प्रश्न निजी जिन्दगी से जुदा है और जवाब नहीं दिया लेकिन वहां बहस शुरू हो गयी की आखिर सच क्या है?? लेकिन हैरानी इस बात की है की जिससे सवाल था उसने एक बार भी यह नहीं कहा की 'आई एम विर्जिन' अब बाकी बहस से हमें मतलब नहीं है .
सवाल यह है की क्या आज सच में सेक्स और विर्जिनिटी जैसी बातें समाज के लोगों का 'स्टेटस' तय करती हैं क्या सच में यदि कोई यह कहता है की वो विर्जिन है तो उसे पिछड़ा या यूँ कहें की बक्वार्ड माना जाता है इस रियलिटी शो से तो ऐसा ही लगता है और ये रियलिटी शो युवाओं का सबसे पसंदीदा शो है। जिसमें जम के गालियाँ दी जाती है हाँ यह ठीक है की सन्सर अब्यूस होने की वजह से टीवी पर बीप के रूप में सुनाई देती है लेकिन समझ में आ जाता है की कौन सी गाली दी गयी है।
आज हमारे समाज में कुछ ऐसी चीज़े शामिल हो गयी है की उन्हें निगलना मुश्किल हो रहा है क्या मोडर्न होने का पैमाना सिर्फ सेक्स या वो पहनावा है जिसमें पहनने वाले और देखने वाला दोनों को अजीब लगता हो ??? कुछ जगहों को छोड़ दें तो मोडर्न पहनावा ऐसा है की मध्यमवर्गीय लड़ियों को पहनने में संकोच तो होता है लेकिन वो भी मोडर्न बनने की रेस में पिछड़ न जाएँ तो वो भी लगी हुयी हैं इस रेस मैं, इस झूठी मोड़ेर्निटी को अपनाने में । मैं यह नहीं कहूँगा की आधुनिक पहनावा पूरी तरह से अस्वीकार कर दो। लेकिन आप ऐसा तो पहनिए की देखने में अच्छा लगे और बताने में भी आपको इज्जत मिले, और आपको अपनी नज़रें न झुकानी पड़े।
ऐसे ही भाषा का इस्तेमाल भी जिस प्रकार हो रहा है वो तो और कमाल और अजब- गजब है क्योंकि आज कल एक चीज़ जो प्रचलन में है की अंग्रेजी में गालियाँ दो तो कोई बुरा नहीं मानता । आम तौर पर देखने में आता है की बास्टर्ड, फक, सक, और अन्य कई शब्द ऐसे हैं जो धड़ल्ले से प्रयोग में आते हैं। इससे भी ज्यादा कमाल तो इस बात का है की लड़का हो या लड़की इन गालियों का कोई बुरा नहीं मानता। और न ही अंग्रेजी में गाली देने में परहेज़ करता है लेकिन यदि एक भी गाली हिंदी में दे दी तो भाई साहब भगवन कसम आप बक्वार्ड तो बन ही जाओगे साथ साथ पुलिस केस भी हो सकता है इसमें कोई शक नहीं है। अब ऐसा सिर्फ लड़कियों के साथ नहीं हैं बल्कि लड़के तो पहले से इन सब चीजों के लिए बदनाम हैं । अभी हाल ही में साहित्यकारों ने एक-दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाये सिर्फ भाषा को लेकर और भाषा वो जिसकी पूरक गालियाँ हो। यहाँ तक की लेखिकाओं के लिए छिनाल शब्द तक का प्रयोग किया गया अब न जाने समाज में कौन सी भाषा स्थान लेने जा रही है???
वैसे भी आज देश में अंग्रेजी पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया जा रहा है आज हमारे समाज में अंग्रेजी का हाल कुछ ऐसा है जैसा की नए जूते का होता है मतलब हम नए जूते को तब तक रगड़-रगड़ कर पहनते है जब तक उसकी माँ बहन न कर दें । ऐसे ही अंग्रेजी का एक शब्द सीखते ही उसको इतनी बार प्रयोग में लाते है की जब तक सारे दोस्त गाली न देने लगें या ये न कहने लगें की भाई इस शब्द को माफ़ कर दे। अब जैसे मैं खुद ही कुछ शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा करता हूँ जिनमे अल्टीमेट, क्लासिक और भी कुछ शब्द हैं और हाँ ऊपर एक जगह मैंने गाली दी है लेकिन दिल्ली का हूँ न तो पता ही नहीं चला की गालियाँ देना कब सीख लिया गालियाँ दिल्ली की स्पेसिलिटी मानी जाती है ओर्र सच तो ये है की लेख सबको पढाना है वरना शायद इसमें गालियों की मात्रा ज्यादा भी हो सकती थी दिल्ली में आपको और कुछ आता हो या न लेकिन वाक्यों में हेल्पिंग वर्ब की तरह गालियों का प्रयोग जरुर आता है।
और सच कहू तो मैं भी इस सब से बाहर नहीं हूँ लेकिन बस लिख रहा हूँ , बस कुछ यूँही
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