इमरान खान और सोनम कपूर अभिनीत फिल्म आई हेट लव स्टोरी बाक्स आफिश पर भले ही धमाल मचा रही हो लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहाँ फिल्म की कहानी, अभिनेता और अभिनेत्री से शायद ही कुछ लेना- देना हो, लेकिन फिल्म का नाम उन्हें खूब रास आ रहा है, और वो जगह है खाप पंचायत। आज पूरा देश और समाज खाप पंचायत, ऑनर किलिंग अर्थात इज्जत बचने के नाम पर क़त्ल को लेकर दो फाड़ होता नज़र आ रहा है। कोई गलत कहता है तो कोई सही बताता है। असल में ऑनर किलिंग है क्या ??? हिन्दू संस्कृति के अनुसार वर- वधु का गोत्र यदि एक है तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वे भाई- बहन या उनके बीच कुछ ऐसा रिश्ता होगा जिससे उन दोनों का विवाह नहीं हो सकता।
दूसरा पक्ष यह है की शादी करने वाले शादी बिना घर वालों की इच्छा से कर रहे हैं। अभी तक जितनी भी शादियाँ हुई है उनमें अधिकतर में सिर्फ लड़के और लड़की की ही सहमती थी। दोनों मेंसे किसी के परिवार की भी सहमती नहीं थी। तो ऐसे में खाप का काम है की वह शादी करने वालों पर सामाजिक दबाव बनाये की वह शादी न हो। लेकिन शादियाँ होती हैं और फिर होती है ऑनर किलिंग यानी इज्जत के नाम पर ऑनर किलिंग यानि हत्या। कानून के अनुसार शादी के लिए आपको बालिक होना जरुरी है लेकिन कानून में गोत्र विवाद पर कुछ नहीं है लेकिन हमारी संस्कृति में यह मान्य नहीं है। यह भी देखें यह बात वैज्ञानिकों के द्वारा प्रमाणित है की जिस तरह पति- पत्नी का एक ब्लड ग्रुप होने पर उनके होने वाले बच्चों में विकार आने की संभावनाएं औरों की अपेक्षा ज्यादा होती है। उसी प्रकार एक गोत्र होने पर भी विकार की संभावनाएं होती हैं। अब जो लोग ऑनर किलिंग का विरोध कर रहे हैं उनका कहना है की यदि उनके बच्चों में विकार आता है तो इससे समाज को क्या ????? ये उनका अपना सर दर्द है।
एक नज़र उस परिवार की तरफ भी देखें जो एक गोत्र में विवाह के पक्ष में तो नहीं हैं परन्तु अगर वे बच्चों के प्यार में आकर शादी कर भी दी और अब उनके वंश को आगे बढ़ाने वाले बच्चों में यदि विकार आ जाये तो उनकी क्या स्थिति होगी। बच्चों के लिए समाज से बैर लिया और अब उनका वंश बढाने वाले बच्चों में विकार आ जाये तो क्या वे अपने बच्चों को पहले जैसा प्यार दे पाएंगे जिन्होंने उनकी विवाह संबंद्धि बात नहीं मानी।
एक और बात ऑनर किलिंग को गैर कानूनी माना है और मानना भी चाहिए क्योंकि आप सिर्फ इसलिए किसी की हत्या नहीं कर सकते की आपकी इज्जत का सवाल है। परन्तु उन माता-पिता का क्या करें जो अपना खून पसीना लगाकर प्यार से पाल- पोश कर बड़ा करें और बच्चें उन्ही की इज्जत पर बट्टा लगा दें , और समाज में माता पिता का उठाना बैठना दूभर हो जाये।
एक पुराणी कहावत है ;
एक बाप को यह हक है की जो घर उसने बनाया उसे जला कर राख कर दे ख़त्म कर दे "
यह लाइन ऑनर किलिंग को बढ़ावा देती नज़र आती है ऐसा ऊपर से प्रतीत होता है परन्तु इसके भीतर उस पिता के दर्द को देखना होगा जिसने खून पसीने और परिश्रम से बनाये अपने ही घर को आग लगनी पड़ी। आखिर ऐसा क्या हुआ जो उसे ऐसा करना पड़ा
एक सवाल और की क्या कानून और ऑनर किलिंग का विरोध करने वालों को ऑनर किलिंग में मारे गए लोगों की मौत का दुःख उनके परिवार से ज्यादा हो सकता है ????? चाहे उनकी हत्या उनके अपने परिवार वालों ने ही की है।
भारतीय या हिन्दू संस्कृति कोई इतनी छोटी नही है की उसमे इस समस्या का समाधान न हो बस थोडा ध्यान देने की जरूरत है। और ऑनर किलिंग जैसी खतरनाक समस्या से बचा जा सकता है। जो समाज को बांटने का काम कर रही है।
kuch puraani manyataao k chalte auner killing k naam par nirdosh logo ko marna kisi bhi drishti se thik nhi h kyonki hamare desh main sabhi ko apne faisle lene ka hakk hai. aur agar iske liye bhaavi peedhi mein vikaar ka hawaala diya jata hai to yahan mai ek baat spasht kar du ki ek samudaayein aisa h jahan aapsi rishtedaari main bhi shaadi hoti hai lekin unke bachho m to koi vikkar nahi hota... ye kuch rudiwaadi maanyataao ko jabardasti yuvaa peedhi par thopne k alaawa aur kuch nahi hai...
ReplyDeleteThis comment has been removed by a blog administrator.
ReplyDeletepahli baat maine hatya ko kabhi sah nhi kaha ... lekin mai ek gotra me shaadi karne ke khilaaf hu..yadi aapki mane to koi apni bahan se bhi shadi kar le kya fark padta hai... fir to bachpan se jis bahan se rakhi bandhva rhe the ek din achanak us par aapka dil aa gaya or aapne shaadi kar li mere khayaal se ye sunne me hi kitna bhadda lagta hai.. aap dekh leejiye.. isse hamari naitikta kis or jayegi.. yah bhi dekhiye.. jis bahan ki raksha ka vachan bhai deta hai us ab vachan ka kya kare.. ???? kyonki bahan ya or koi jinka gotra ek hai.. us rishte or ek wife k rishte me kya antar hai ye btane ki jarurat nhi hai,...
ReplyDeletethanx sir or mai jaan boojh kar specific nhi hua nhi to aap muhje ya to hatya k saath maan lete ya nhi.. next tym kosis karunga ki or achcha karu ..
ReplyDeletedhanyavaad
pehli baat to ye ki maine bhaai behen k rishte par comment nhi kiya. just aapke scientific logic k baare m bataya hai...aur oner killing m to izzat bachaane k naam par do pyaar karne waalo ko bina kisi reason maar diya jaata hai... isse aap kahan tak sahi kohoge??? agar issi tarah hota raha to shaayad desh main koi apni azaadi se shaadi kaa faisla bhi nhi kar sakta aur wo jabardasti un par thopa hi jayga... aur rahi baat gotra ki to uske liye mama k gotra ko bhi maana jaata h...
ReplyDeletekhaap panchayaton se nivedan hai ki gaanv ki stithiyon par bhi itna dhyan de jitnne pyar karne walon par de rahe hain... aise log kewal ek gotra mein shadi ke khilaaf nahi hain balki inter cast marriages ke bhi khilaaf hain.. balki ek gotra mein shadi se jyada gussa to inhe iss baat par aajata hai jab inke bachhe apne se kam jaati kesaathi se vivaah kar lete hain. mera aap sabhi se niwedan hain bachon ki shimsha,lalan palan or ache aachar vichaar par adhik dhayan de..aap samaj ko sahi raah de gumraah na karen. aap badehain, bujurg hain ham aapka sammaan karte hain..aapke experience or hamari nayi soch hi esh ko bada sakti hai, or aggar aap hamare saath aisa vyawhar karenge to sochiye kya hoga..
ReplyDeleteविकास भाई इधर भी ज़बरदस्त असहमति है। खाप पंचायतों के अच्छे क़दमों का समर्थन किया जाना चाहिए। लेकिन इस आधार पर उसके गलत कामों का विरोध करना भी उतना ही ज़रूरी है। हम यह नहीं कहते कि ढूंढ-ढूंढ कर समान गोत्र में शादियाँ की जाएं। लेकिन किसी ने यदि ऐसा कर लिया है तो उसे मौत की सजा देने को भी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता, भले ही हत्यारा परिवार का मुखिया ही क्यों न हो। अपने यहाँ समान गोत्र के लोग भाई बहन माने जाते हैं। यह सदियों से चली आ रही हमारी सामाजिक मान्यताहै। अगर हमें इस मान्यता को बनाए रखना है तो कोई बीच का रास्ता निकालना होगा। अपने यहाँ इस तरह के मसलों को 'गाँव-निकाला' जैसे उपायों से डील करने किया जाता रहा है। यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
ReplyDeleteअपने मुस्लिम समाज में तो अक़सर एक ही परिवार में निकाह होते हैं, वहां तो कभी जेनेटिक समस्याएं नहीं देखने में आईं। जैसा कि नेहा ने कहा भी है। फिर मैं बहुत से ऐसे हिन्दुओं को भी जानता हूँ, जिन्होंने समान गोत्र में शादी की और आज अपने नाती-पोतों के साथ खुशहाल ज़िन्दगी जी रहे हैं। फिर अंतरजातीय विवाह पर भी कुछ कहिये। आप खुद अपने तर्कों में घेर लिए जाएंगे।
और एक बात, रक्षा बंधन और भाई-बहन के रिश्ते पर कही गई आपकी बात मुझे बेहद भद्दी लगी। अभी २०-२५ दिन पहले ज़ी न्यूज़ पर एक बहस में एक जाट नेता ने ऐसा ही कुछ कहा था। महिला एंकर ने खुद उसे लगभग डांटते हुए ज़वाब दिया। इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि टीवी के इतिहास में ऐसा रोज़-रोज़ नहीं होता। समगोत्रीय विवाह आज से नहीं हो रहे। यदि इससे भाई-बहन के रिश्ते की पवित्रता भंग होनी होती तो हो चुकी होती।
खबर है कि सरकार ऑनर किलिंग पर सख्त रुख अपनाने जा रही है। कानून मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को एक मसौदा तैयार कर भेजा है, जिसके तहत हत्या संबंधी निर्णय देने वाली पंचायतों पर हत्या के आरोप के तहत मुक़दमा चलाया जा सकेगा। पहले इन पंचायतों पर आपराधिक साज़िश रचने का मुक़दमा चलाया जाता था। निश्चित रूप से सरकार का यह क़दम सराहनीय है। लेकिन सरकार इससे ज्यादा बहुत कुछ कर भी नहीं सकती। हकीकत यही है कि कानून के जोर से भी बहुत परिवर्तन होने वाला नहीं है। परिवर्तन खुद समाज को लाना होगा। क्योंकि इस बदलते समाज में, जब तक हमारे मन-मस्तिष्क में मान-सम्मान के सही मायने स्पष्ट नहीं होंगें, तब तक ऑनर किलिंग जैसे अभिशाप पूरी तरह ख़त्म होने वाला नहीं है। एक बात हमें समझ लेने की ज़रुरत है कि परंपरा कोई भगवान नहीं होती। सवाल परंपरा पर भी उठाया जा सकता है। खैर, उल्लेखनीय बात यह है कि ऑनर किलिंग के आईने में एक नई बहस जोर पकड़ रही है, जिसमें प्रेम और पढी-लिखी आधुनिक सोच मिलकर सामाजिक परम्पराओं और खानदानी प्रतिष्ठा को चुनौती दे रहे हैं। दोनों में से किसका जोर बड़ा है, यह वक़्त बता देगा।
असहमति के बावजूद लेख के शीर्षक की रचनात्मकता की प्रशंसा करने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ।
meri post k last pahra jarur padhe ,... jisme likha hai bahut raste hai hamari sanskruti me isse bachne ke or gotra me shaadi karne ke bahut se raste hai or honge.. maine hatya ka samarthan nhi kiya...
ReplyDeleteor milkar baat hogii bahut baat hai karne ko..ok
thanx fon comment
....
sahi kaha kuldeep bhaiya .. kanoon kuch nhi kar sakta,.. ye samay ki ladai hai.. or isse samay hi jeetega.. or haan main hatya k nhi parampra ke paksha me hu.. kyunki hatya parampara nhi hai... kyu bhaiya ji...
ReplyDelete